खतरे में साहेबगंज के पहाड़, अवैध तरीके से निकाले जा रहे पत्थर

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बरहरवा (झारखंड): अपने खूबसूरती के लिए मशहूर साहेबगंज के पहाड़ों का वजूद पत्थरों के अवैध उत्खनन की वजह से खतरे में पड़ गया है। कुछ दशकों में  सूबे से दर्जन से अधिक पहाड़ों का नामोनिशान मिट चुका है और कई दर्जन खत्म होने की कगार पर हैं।

ऐसा ही एक नज़ारा साहेबगंज जिले के पतना प्रखंड स्थित पहाड़ियों पर देखा जा सकता है। पतना प्रखंड स्थित सभी पहाड़ों पर अवैध रूप से उत्खनन किया जा रहा है। खनन मानकों को ताख पर रख अनेकों पत्थर खदान एवं क्रेशर संचालित है जिन पर विभाग पूरी तरह से मौन है सड़कों पर आवागमन बाधित कर हैवी ब्लास्टिंग की जाती है, जिससे आवागमन करने वालो के सर पर हमेशा मौत मंडराती रहती है।
दबंग पत्थर माफिया सारे नियम कानून को ठेंगा दिखाते हुए ना केवल अवैध तरीके से पत्थर निकाल रहे हैं बल्कि पर्यावरण को भी खासा नुकसान पहुंचा रहे है, जबकि इन अवैध उत्खननों की निगहबानी के लिए उत्तरदायी खनन विभाग कानों में तेल डाले सोया पड़ा है।
झारखण्ड की आदिवासी संस्कृति में पहाड़ों, वन और नदियों का खास महत्व है और यहां रहनेवाले आदिवासियों से यह सीधी तौर पर जुड़ा है। इसके बावजूद साहेबगंज के में इन पहाड़ो को बचाने के लिए अबतक कोई प्रयास नहीं किये गए हैं।
हेवी ब्लास्टिंग के जरिए अवैध तरीके से पहाड़ो को तोड़ा जा रहा है। इस अवैध धंधे में माफियाओं का एक सुसंगठित तंत्र काम करता है, जिसके तार दूसरे राज्यों तक फैले हुए हैं। ऐसे में बेतरतीब तरीके से की जा रही अवैध उत्खनन से पर्यावरण को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। वहीं खनन के लिए उत्तरदायी खनन विभाग का भी मानना है कि इसे रोकने के लिए लोगों में जागरुकता का होना बेहद जरूरी है।
ब्लास्टिंग की वजह से आसपास के गांवों पर भी खतरा मंडरा रहा है। कई जगहों पर तो स्कूलों की दूरी ब्लास्ट साइट्स से चंद फासलों पर है। जिसकी वजह से पढ़ने वाले बच्चों पर भी जान का खतरा बना हुआ है। जिन पहाड़ो की कटाई हो रही है, वो आबादी से बिलकुल सटे हैं।
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