गुदड़ी का लाल: किसान का बेटा गांव से निकल कर बना भोजपुरी सिंगर

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सष्टि पाल

महेशपुर (पाकुड़): “होनहार बालक के चिकने पात” यह  श्लोक शहरग्राम के सष्टि पाल पर सही चरितार्थ होता है। किसान रंजन पाल का बेटा  सष्टि पाल बचपन से गाने के शौकीन था। बचपन में स्कूल के सांस्कृतिक कार्यक्रम में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेता था और दिन भर गुनगुनाता रहता था। सष्टि पाल ने अपनी प्रारंभिक एवं माध्यमिक पढ़ाई शहरग्राम से ही पुरा किया। इन्टर और स्नातक की पढ़ाई के लिए पाकुड़ केकेएम कॉलेज पूरा किया। लेकिन उसका पुरा ध्यान सिर्फ गीत लिखने और गाने में गुजरता था।

इसी दौरान गांव के दीपक गुप्ता, गोलू मडैया, गोपाल पाल,  हीरालाल साह के सहयोग से पटना के एक स्टूडियो से सम्पर्क किया और पटना चल दिया। पटना में उसने एक स्टूडियो के मदद से पहला एलबम “माई से अइहअ” एलबम लाॅच किया। यह गाना इतना हीट हुआ कि देखते ही देखते  सष्टि पाल  भोजपुरी संगीत के प्लेटफार्म में चर्चित हो गया। उसने एक के बाद एक बीस एलबम लाॅच किया। उसकी एक ही इच्छा है कि एक दिन वो भोजपुरी संगीत के सुपरस्टार गायब बने।

माता-पिता दोस्तो ने दिया साथ:

भोजपुरी संगीत में मुकाम हाशिल करने लिए माता पद्दा देवी, पिता रंजन पाल के अलावे गांव के दोस्त दीपक गुप्ता, रंजीत साहा, गोलू मडैया, हीरालाल साह ने उनका भरपुर सहयोग किया। जब भी  सष्टि पाल  को सहयोग की जरूरत हुआ उनके दोस्तो ने खुलकर सहयोग किया। आज सष्टि पाल के कई दोस्त उनके साथ एलबम  सुंटीग करने में भी सहयोगी है ।

कौन कौन एलबम हुआ हीट:

माई से आईहअ, जान भेंट करके, पाल जी का बेटा हूँ, पल-पल-पल, मनवा लाॅलीपांप मांगे यह भोजपुरी एलबम काफी पोपुलर हुआ।

यूट्यूब साइड में देख सकते है एलबम:

सिंगर षष्ठी पाल से लाॅच एलबम को सोशल साईड यूट्यूब के चैनल “सष्टि सिंगर पाल” में जाकर सभी एलबम लाइव देखा जा सकता है।

संवाददाता: सुभम कुमार भगत, महेशपुर, पाकुड़

 

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